बगैर बिल के हिमाचल से मंगावाते थे गुटखा और सिगरेट का कच्चा माल, हवाला से करते थे भुगतान

Posted By: Himmat Jaithwar
7/2/2020

इंदौर. अवैध गुटखा और सिगरेट के कारोबार में 338 करोड़ रुपए की कर चोरी का आरोपी किशोर वाधवानी और उसकी गैंग गुटखे और सिगरेट का कच्चा माल हिमाचल प्रदेश से मंगवाते थे। यह कच्चा माल बगैर बिल के इंदौर आता था और इसका भुगतान वाधवानी की गैंग द्वारा हवाला के माध्यम से किया जाता था। सिगरेट और गुटखे की पैकिंग में इस्तेमाल बॉक्स की प्रिंटिंग इंदौर में ही होती थी। डीजीजीआई और डीआरआई की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। गौरतलब है कि उद्योगपति वाधवानी, माटा समेत अन्य आरोपी 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं।


डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) द्वारा ऑपरेशन कर्क के तहत 30 मई को पहला छापा मारा गया था, तब से यह कार्रवाई जारी है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि गुटखा और सिगरेट बनाने के लिए कच्चा माल हिमचाल प्रदेश से मंगवाया जाता था। स्थानीय एजेंसियों से खपत छिपाने के लिए पूरा माल कच्चे बिल पर मंगवाया जाता था। इस माल का भुगतान भी हवाला के माध्यम से ही किया जाता था। जांच एजेंसियों को इस बात की भी जानकारी लगी है कि गुजरात का एक बड़ा हवाला कारोबारी भी वाधवानी और उसकी गैंग के संपर्क में था। इस लिंक के माध्यम से दुबई तक पैसा भेजने की बात सामने आई है। जांच में इस बात का भी पता चला है कि सिगरेट और गुटखे की पैकिंग में उपयोग होने वाले बॉक्स की प्रिंटिंग इंदौर में ही होती थी। इसका भी ना तो बिल बनता था और ना ही टैक्स चुकाया जाता था। जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए प्रिंटिंग प्रेस संचालक को हिरासत में लिया है। 

वाधवानी के करीबियों के नाम नोटबंदी के बाद बनी बोगस कंपनी, किया करोड़ों का लेन-देन
टैक्स चोरी मामले में उद्योगपति किशोर वाधवानी पर डीजीजीआई की जांच-पड़ताल जारी है। डीजीजीआई ने छह साल पुराने दस्तावेज भी खंगाले हैं। इनमें नोटबंदी के तत्काल बाद कुछ कंपनी बनाए जाने की जानकारी भी शामिल है। वाधवानी के करीबियों के नाम पर यह बोगस कंपनी बनाई गई हैं। इन कंपनी के जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन होना दिखाया गया है। वहीं सिगरेट में लगने वाले फिल्टर भी खरीदे जाने के प्रमाण मिले हैं। डीजीजीआई को जांच में पता चला है कि विनायक नामक कंपनी से टेन इंटरप्राइजेस और केशव इंटरप्राइजेस के बीच लेनदेन हुआ है। इन दस्तावेजों की जांच बाद टैक्स चोरी का आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है।



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