नंदीग्राम की तरह सिंगूर में भी कांटे की टक्कर; जहां से टाटा का प्लांट उखाड़ा था, वो जमीन अभी भी खाली, बेरोजगारी बड़ा मुद्दा

Posted By: Himmat Jaithwar
4/3/2021

सिंगूर। ममता बनर्जी को बंगाल की सत्ता सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन से मिली थी, लेकिन इस बार इन दोनों ही सीटों पर कांटे की टक्कर है। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के चलते दीदी के लिए मुश्किल खड़ी हुई तो सिंगूर में रविंद्रनाथ भट्टाचार्य उनके लिए चुनौती बन गए हैं, क्योंकि वे लगातार चार बार से सिंगूर के विधायक हैं। पहले TMC में ही थे। इस बार पार्टी ने उन्हें उम्र का हवाला देते हुए टिकट देने से इंकार कर दिया तो 88 साल के रविंद्रनाथ BJP में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें सिंगूर से मैदान में उतार दिया।

रविंद्रनाथ वो शख्स हैं जो सिंगूर आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। किसानों को ममता के पक्ष में करने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। क्षेत्र में उनकी छवि भी बेदाग है, लेकिन अब वो और ममता एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। TMC ने सिंगूर से बेचाराम मन्ना को उम्मीदवार बनाया है। बेचाराम अभी सिंगूर के पास ही लगने वाली हरिपाल सीट से TMC के विधायक हैं, लेकिन उनके और रविंद्रनाथ के बीच हमेशा तल्खी रही। इस बार हरिपाल से बेचाराम की पत्नी को TMC ने कैंडिडेट बनाया है।

कुछ स्थानीय लोगों में इस बात का भी गुस्सा है कि एक ही परिवार से पति-पत्नी को टिकट दे दिया गया। हालांकि लोग दबी जुबान से कह रहे हैं कि डरा धमकाकर टिकट हासिल किया गया है। बुधवार को ममता ने सिंगूर में सभा को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि यदि रविंद्रनाथ सिंगूर से कैंडिडेट नहीं होते तो वे नंदीग्राम के बजाय सिंगूर से चुनाव लड़तीं।

जहां से टाटा का प्लांट हटाया था, वो जमीन खाली पड़ी

जिस जमीन के अधिग्रहण को लेकर 2008 में विरोध हुआ था, वो अभी खाली है। कुछ पर थोड़ी बहुत खेती हो रही है तो कुछ बंजर हो गई है।
जिस जमीन के अधिग्रहण को लेकर 2008 में विरोध हुआ था, वो अभी खाली है। कुछ पर थोड़ी बहुत खेती हो रही है तो कुछ बंजर हो गई है।

CPM की सरकार के दौरान टाटा ग्रुप ने सिंगूर में नैनो कार का प्लांट लगाया था। इसके लिए किसानों की जमीनें अधिग्रहीत की गई थीं। इसी अधिग्रहण के खिलाफ ममता ने किसानों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था। नतीजा ये हुआ कि टाटा ग्रुप को सिंगूर छोड़ना पड़ा। प्लांट का जो हिस्सा बना था, उसे सरकार में आते ही ममता ने जमींदोज करवा दिया। अब यह जमीन खाली पड़ी है। कुछ पर खेती हो रही है तो कुछ बंजर हो गई है।

स्थानीय युवक दीपक राय कहते हैं, 'प्लांट लगता तो आज मुझ जैसे हजारों युवकों को नौकरी मिल जाती, लेकिन प्लांट लगने नहीं दिया और कोई नई इंडस्ट्री भी शुरू नहीं की, इसलिए यहां बेरोजगारी बहुत है।' इसके जवाब में TMC कार्यकर्ता गौतम चटर्जी कहते हैं, 'दीदी ने घोषणा की है कि वो सिंगूर में सौ एकड़ जमीन में एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री बनाने जा रही हैं, इससे बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। दीदी ने ही डिग्री कॉलेज शुरू किए। बंगाल में दो ही ट्रॉमा सेंटर हैं, जिसमें से एक सिंगूर में है। पिछले दस सालों में पूरे क्षेत्र में विकास किया गया है।' ग्राउंड पर घूमने पर पता चलता है कि सिंगूर में सड़क, पुल-पुलिया तो बने हैं, लेकिन ये बात भी सही है कि लोगों के पास कामधंधा नहीं है।

कुछ लोग यहां TMC के काम से खुश हैं, लेकिन कई लोगों का मानना है कि अगर यहां इंडस्ट्री लगी होती तो वे बेरोजगार नहीं होते।
कुछ लोग यहां TMC के काम से खुश हैं, लेकिन कई लोगों का मानना है कि अगर यहां इंडस्ट्री लगी होती तो वे बेरोजगार नहीं होते।

दीदी की योजनाओं से ग्रामीण खुश, भट्टाचार्य से BJP को मिली ताकत

सिंगूर के बहुत से लोग ममता सरकार की योजनाओं से खुश नजर आ रहे हैं। वे मुफ्त मिल रहे राशन के साथ ही कन्याश्री, रूपश्री, सुबोधश्री जैसी योजनाओं की तारीफ करते हैं, लेकिन युवा वर्ग बेरोजगारी के चलते सरकार से नाराज है। TMC के लिए रविंद्रनाथ भट्टाचार्य भी चुनौती बनते दिख रहे हैं, क्योंकि बीस सालों से वे विधायक हैं इसलिए उनका खुद का एक बड़ा जनाधार है। ज्यादा उम्र होने के सवाल पर उन्होंने हमसे कहा, 'मैं पूरी तरह से स्वस्थ्य हूं। BJP ने मुझे सम्मान दिया, इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं। TMC ने जिस बेचाराम मन्ना को कैंडिडेट बनाया है, वो पूरी तरह से गलत नीतियों वाला आदमी है। ममता बनर्जी ने सिंगूर में कोई प्लांट नहीं लगने दिया। BJP की सरकार आएगी तो हम इंडस्ट्रीज डेवलप करेंगे।'

वहीं बेचाराम मन्ना का कहना है, 'मैं ऐतिहासिक आंकड़े से जीतूंगा। रविंद्रनाथ दलबदलू हैं इसलिए उन्हें सिंगूर पसंद नहीं कर रहा।' स्थानीय तपन दास कहते हैं, 'हमारे विधानसभा में सब कुछ काम हुआ है। इतना पाया है कि बता भी नहीं सकते। दीदी पांच साल और रह गईं तो बंगाल का कोई आदमी भूखा नहीं रहेगा।' तमुल अधिकारी कहते हैं, 'रास्ता-घाट बहुत अच्छा हुआ है।'

रविंद्रनाथ भट्टाचार्य TMC के कद्दावर नेता थे। इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने बगावत कर दी और भाजपा में शामिल हो गए।
रविंद्रनाथ भट्टाचार्य TMC के कद्दावर नेता थे। इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने बगावत कर दी और भाजपा में शामिल हो गए।

2 लाख 30 हजार वोटर्स, 12% अल्पसंख्यक

सिंगूर में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा वोटर्स हैं। इनमें करीब 12% अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लेफ्ट-CPIM और कांग्रेस के गठबंधन के चलते अल्पसंख्यक वोट बंट जाएंगे। वहीं हिंदू वोट मुख्यतौर पर TMC और BJP के बीच ही बंटना है। CPM भी यहां इंडस्ट्री लगाने के दावे कर रही है। पार्टी का कहना है कि लोग इस बार उन्हें इसलिए सपोर्ट करेंगे क्योंकि TMC के सिंगूर आंदोलन से सिर्फ पार्टी के टॉप लीडर्स को फायदा हुआ और वो करोड़पति बन गए।

आम लोगों की जिंदगी में कुछ नहीं बदला। सिंगूर विधानसभा सीट हुगली जिले में आती है। हुगली की लोकसभा सीट से BJP की लॉकेट चटर्जी ने 2019 में 70 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। इस कारण भी सिंगूर में BJP का संगठन मजबूत नजर आ रहा है और उसे इस बार जीत की पूरी उम्मीद है।



Log In Your Account